संपादक (गुलफान अहमद )देहरादून प्रदेश में वन संरक्षण और पर्यावरण प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में वन विभाग की कैंपा परियोजना संचालन समिति की 12वीं बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 339 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को हरी झंडी दे दी गई। बैठक में वन संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और वनाग्नि प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी।मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मृदा-जल संरक्षण कार्यों के तहत प्रत्येक वन प्रभाग में एक बड़े बहुआयामी परियोजना को चिन्हित कर उसका विस्तृत और प्रभावी प्रस्ताव तैयार किया जाए। साथ ही सारा, जलागम एवं अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से राज्य स्तर पर कम से कम तीन एकीकृत जल संरक्षण परियोजनाएं तैयार करने को कहा गया, ताकि दीर्घकालिक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कैंपा के अंतर्गत चल रहे कार्यों के निरीक्षण एवं तृतीय पक्ष मूल्यांकन के लिए तीन से चार एजेंसियों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने बजट के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण व्यय तथा प्रभावी मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया।मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में सभी जनपदों में 10 नए अस्थायी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए 19 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु 8 करोड़ 60 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में देहरादून तथा हल्द्वानी में वन क्षेत्राधिकारी स्तर तक के कार्मिकों के लिए आवासीय भवनों के निर्माण हेतु 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वनाग्नि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 12 करोड़ रुपये, जिसमें वन पंचायतों के लिए 2 करोड़ रुपये शामिल हैं, का अनुमोदन किया गया।इसके अतिरिक्त मृदा एवं जल संरक्षण के अंतर्गत जलधाराओं के उपचार के लिए 19 करोड़ 50 लाख रुपये की धनराशि को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में वन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
*339 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना मंजूर, हर जिले में खुलेंगे 10 नए रेस्क्यू सेंटर*
