सह संपादक नसीब कुरैशी
हरिद्वार। चंडी देवी क्षेत्र में मिले अज्ञात महिला के शव के मामले का खुलासा कर हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर अपनी पेशेवर कार्यशैली और तकनीकी जांच क्षमता का परिचय दिया है। जिस मामले में न मृतका की पहचान थी, न कोई प्रत्यक्षदर्शी और न ही कोई ठोस सुराग, उस चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड मर्डर केस को हरिद्वार पुलिस ने अथक प्रयासों और वैज्ञानिक विवेचना के दम पर सुलझा लिया।10 मई को चंडी देवी रोपवे के पास जंगल में एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में मृतका की पहचान नहीं हो सकी और पुलिस को कोई प्रत्यक्ष सुराग भी नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच के दौरान 8 मई की एक फुटेज में मृतका कौशल्या तीन युवकों के साथ चंडी देवी मंदिर की ओर जाती दिखाई दी।यहीं से जांच को नई दिशा मिली। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल डेटा और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर करीब 3540 लोगों का रिकॉर्ड खंगाला। कई दिनों तक चली गहन पड़ताल के बाद जांच की कड़ियां उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद तक पहुंचीं। इसके बाद पुलिस टीम ने 6 जून को बांदा से राकेश, रामप्रकाश और छेदीलाल को गिरफ्तार कर मामले का सफल खुलासा कर दिया।पूरे प्रकरण में हरिद्वार पुलिस की सूझबूझ, धैर्य और तकनीकी दक्षता की व्यापक सराहना हो रही है। विशेष रूप से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जिस तरह बिना किसी प्रत्यक्ष साक्ष्य के मामले की तह तक पहुंचकर आरोपियों को गिरफ्तार किया, वह आधुनिक पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।एसएसपी नवनीत सिंह लगातार अपराध नियंत्रण और प्रभावी विवेचना को लेकर पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बेहद जटिल और ब्लाइंड माने जा रहे इस हत्याकांड का भी सफल अनावरण हो सका। प्रेस वार्ता में एसएसपी ने जांच टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें 7500 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की।पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल एक सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत नेतृत्व और समर्पित पुलिस टीम के सामने अपराधी अधिक समय तक कानून से बच नहीं सकते।
