संपादक गुलफान अहमद
इमलीखेड़ा। गांव इमलीखेड़ा में विकास के दावों की पोल उस समय खुल गई, जब एक मृतक की अंतिम यात्रा को शमशान घाट तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कीचड़ और दलदल से भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। बारिश के बाद रास्ता पूरी तरह खराब हो चुका था, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने बताया कि शमशान घाट तक जाने वाली सड़क वर्षों से बदहाल पड़ी है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पक्की सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। हालात यह रहे कि अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को अर्थी कंधों पर उठाकर फिसलते और संभलते हुए आगे बढ़ना पड़ा।
अंतिम यात्रा में शामिल बुजुर्ग, महिलाएं और युवा कीचड़ में फंसते रहे। कई लोगों के कपड़े खराब हो गए और अर्थी ले जा रहे लोगों को बार-बार रुककर रास्ता संभालना पड़ा। इस घटना के बाद गांव में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता गांव में आकर सड़क निर्माण और विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है। लोगों का कहना है कि यदि किसी बड़े अधिकारी या जनप्रतिनिधि को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता, तो सड़क का निर्माण तुरंत हो जाता।
गांव के बुजुर्गों ने इसे केवल सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला बताया। उनका कहना है कि दुख की घड़ी में भी ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से जल्द शमशान घाट तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो गांव के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
