प्रधान सेसंपादक
गुलफान अहमद
हरिद्वार, 15 मार्च।
हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित मोहल्ला मैदानियान की शाह गली में स्थित मस्जिद गरीब नवाज़ में चौबीसवें रोज़े की मुबारक रात नमाज़-ए-तरावीह के दौरान कुरआन-ए-पाक की तकमील (खत्म-ए-कुरआन) इबादत और रूहानी माहौल में सम्पन्न हुई।
बताया जाता है कि नमाज़-ए-तरावीह में कुरआन मजीद मुकम्मल होने के बाद किया जाने वाला खत्म शरीफ (खत्म-ए-कुरआन) रमजान के पवित्र महीने की एक विशेष सुन्नत और बरकत मानी जाती है। यह आमतौर पर रमजान की 27वीं या उससे पहले की रातों में पूरी की जाती है। इस दौरान हाफिज-ए-कुरआन आखिरी रकात (आमतौर पर वित्र से पहले) में कुरआन की अंतिम आयतों की तिलावत करते हैं, जिसके बाद मस्जिद में विशेष रूहानी माहौल में दुआ-ए-खत्म की जाती है। कुरआन मजीद पूरा होने पर अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है और देश में अमन-चैन, भाईचारे तथा तरक्की के लिए विशेष दुआ मांगी जाती है।
इस वर्ष मस्जिद गरीब नवाज़ में नमाज़-ए-तरावीह के दौरान हज़रत हाफिज़ व क़ारी रजब अली साहब ने बेहद खूबसूरत और दिलकश अंदाज़ में कुरआन मजीद की तिलावत करते हुए उसे मुकम्मल किया। नमाज़ियों ने बड़ी अकीदत और तवज्जोह के साथ कुरआन-ए-पाक की तिलावत सुनी। वहीं मस्जिद गरीब नवाज़ के ख़तीब व इमाम हज़रत हाफ़िज़ आस मोहम्मद साहब को नमाज़-ए-तरावीह में कुरआन-ए-पाक सुनने की सआदत हासिल हुई। खत्म शरीफ के बाद सभी नमाज़ियों ने देश में अमन-चैन, साम्प्रदायिक सौहार्द और तरक्की के लिए दुआ की, जिसके बाद मिठाई वितरित की गई।
इस अवसर पर मस्जिद के इमाम हाफिज़ आस मोहम्मद साहब ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे चांद रात को अनावश्यक खरीदारी, हुड़दंग या मौज-मस्ती में समय बर्बाद न करें। उन्होंने कहा कि यह रात इबादत, दुआ और अल्लाह का शुक्र अदा करने की है, न कि गफलत में समय गुजारने की। इस रात जागकर दुआएं मांगना और इबादत करना बेहतर है। उन्होंने कहा कि यह गुनाहों से तौबा करने की रात है और इसी रात अल्लाह तआला की तरफ से रमजान की इबादतों का इनाम अता किया जाता है।
इस मुबारक मौके पर हाजी यूनुस मंसूरी चौधरी, हाजी शाहनवाज मंसूरी (पूर्व जेल विजिटर), चांद मुबारक मंसूरी, सोनू खान, शाहनवाज खान, परवेज खान, सरफराज मलिक, रहीस खान, ठेकेदार शरीफ शाह, गुलजार खान, नौशाद मंसूरी, रिजवान मंसूरी, महबूब राणा शेख, नासिर खान, आजाद मंसूरी सहित कई स्थानीय निवासी मौजूद रहे।
