हरिद्वार। देशभर में लगातार बढ़ रही डीजल की कीमतों ने ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। ईंधन दरों में हो रही लगातार वृद्धि के चलते माल ढुलाई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है और इसका सीधा असर बाजार व्यवस्था तथा आम जनता पर भी पड़ रहा है।
के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। ट्रकों, डंपरों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर आने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। माल भाड़ा बढ़ने से खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह क्षेत्र भारी आर्थिक दबाव झेल रहा है। छोटे और मध्यम स्तर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई वाहन मालिकों के लिए वाहन की किस्त, टैक्स, बीमा, फिटनेस और कर्मचारियों का वेतन निकालना मुश्किल हो गया है। लगातार बढ़ते खर्च और कम होती आय के कारण अनेक कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कुवर राव अखलाख ने कहा कि डीजल के दाम बढ़ने का असर केवल ट्रांसपोर्ट कारोबार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव सीधे आम जनता की जेब पर पड़ता है। माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे महंगाई और अधिक बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने डीजल कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को राहत देने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लागू किया जाए। साथ ही डीजल पर लगने वाले टैक्स में कटौती कर ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के हित में ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों का रोजगार सुरक्षित रह सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो ट्रांसपोर्ट संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि कारोबारियों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया तो इसका असर माल ढुलाई व्यवस्था और बाजार की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
