*सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी देने में सुस्त पड़ा दरगाह प्रशासन, अपील में जाने की तैयारी में अनुरोधकर्ता।*

*सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी देने में सुस्त पड़ा दरगाह प्रशासन, अपील में जाने की तैयारी में अनुरोधकर्ता।**आख़िर किन दरगाह कर्मियों ने बिना प्रशासक की अनुमति के कर लिया यूनियन गठन, किन कर्मियों ने खोला दरग़ाह साबिर पाक के नाम से खाता और किसकी अनुमति से दरग़ाह कर्मियों द्वारा साबिर पाक के नाम से कर लिया लाखों पुस्तको का प्रकाशन ,सभी मामलों का आर टी आई से जल्द होगा खुलासा, क्या दोषियों पर होगी बड़ी करवाई। पढ़िए पूरी खबर।*

विवेक सैनी उत्तराखंड

प्रभारी पिरान कलियर। दरगाह पिरान कलियर के प्रशासनिक कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला हरिद्वार निवासी अफजाल द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दरगाह कार्यालय से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई थीं, लेकिन निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक सूचना उपलब्ध न होने का आरोप लगाया गया है। अब आवेदक ने न्यायालय की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है।आरटीआई आवेदन में पूछा गया है कि क्या कुछ दरगाह कर्मचारियों द्वारा दरगाह प्रशासक की अनुमति के बिना किसी यूनियन का गठन किया गया था। यदि ऐसा हुआ तो उसकी अनुमति, आदेश, संबंधित अभिलेख तथा इस मामले में कार्यालय द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए।इसके अलावा आवेदन में यह भी जानकारी मांगी गई है कि क्या दरगाह साबिर पाक के नाम से किसी बैंक में खाता खोला गया था। यदि खाता संचालित किया गया तो उसकी अनुमति किस सक्षम अधिकारी ने दी, खाते के संचालन से जुड़े अभिलेख क्या हैं तथा इस संबंध में कार्यालय के रिकॉर्ड में क्या विवरण दर्ज है।आरटीआई में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु दरगाह साबिर पाक के इतिहास, चित्रों एवं अन्य सामग्री के संकलन से प्रकाशित पुस्तक को लेकर भी उठाया गया है। आवेदन में पूछा गया है कि पुस्तक के प्रकाशन के लिए कार्यालय से कोई अनुमति दी गई थी या नहीं। यदि पुस्तक प्रकाशित एवं विक्रय की गई है तो उससे संबंधित आय-व्यय अथवा राजस्व का कोई रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध है या नहीं।आवेदक का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में अब वह कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाते हुए न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहा है।अब सभी की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं। यदि मांगी गई सूचनाओं में किसी प्रकार की प्रशासनिक अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित स्तर पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि सभी कार्य नियमानुसार पाए जाते हैं तो आरटीआई के माध्यम से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।फिलहाल यह मामला आरटीआई आवेदन में मांगी गई सूचनाओं तथा आवेदक के आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों अथवा कर्मचारियों का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी शेष है। मामले की वास्तविक स्थिति आरटीआई के जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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